गाजियाबाद से सामने आई एक बेहद दर्दनाक घटना ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक 4 साल की बच्ची के साथ इतनी बड़ी वारदात हुई, लेकिन उससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह रही कि पुलिस और अस्पतालों का रवैया ठीक नहीं था। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में खुद दखल देना पड़ा।
कोर्ट ने साफ कहा कि यह सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि सिस्टम की बड़ी नाकामी है। साथ ही गाजियाबाद के पुलिस कमिश्नर को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया गया है।
यह पूरा मामला 16 मार्च का है, जब एक मजदूर की 4 साल की बच्ची को पड़ोस में रहने वाला एक व्यक्ति चॉकलेट दिलाने के बहाने अपने साथ ले गया। जब बच्ची काफी देर तक वापस नहीं आई, तो उसके पिता ने उसे ढूंढना शुरू किया।
कुछ समय बाद बच्ची बेहोश हालत में मिली और उसकी हालत बहुत गंभीर थी। उसके साथ गलत काम किया गया था और वह खून से लथपथ थी। यह देखकर परिवार पूरी तरह टूट गया।
पिता तुरंत बच्ची को लेकर पास के दो प्राइवेट अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां उसे भर्ती करने से मना कर दिया गया। आखिरकार उसे सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इसके बाद परिवार जब पुलिस के पास पहुंचा, तो उन्हें मदद मिलने के बजाय उल्टा खराब व्यवहार का सामना करना पड़ा। आरोप है कि पुलिस ने परिवार के साथ मारपीट की और उन्हें चुप रहने के लिए धमकाया।
सबसे बड़ी बात यह रही कि घटना 16 मार्च को हुई, लेकिन FIR 17 मार्च को दर्ज की गई। यानी शुरुआत में ही कार्रवाई में देरी हुई।
FIR में भी गंभीर गलती सामने आई। पुलिस ने सिर्फ हत्या का मामला दर्ज किया, जबकि बच्ची के साथ जो हुआ वह साफ तौर पर यौन अपराध था। इसके बावजूद रेप और POCSO Act की धाराएं नहीं जोड़ी गईं, जो बच्चों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी कानून है।
आरोपी को 18 मार्च को गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन बाद में पुलिस ने जो कहानी बताई, उसने और सवाल खड़े कर दिए। पुलिस के मुताबिक आरोपी उन्हें एक जगह ले गया, जहां उसने अचानक गोली चला दी और जवाब में पुलिस ने भी गोली चलाई।
यह मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो बच्ची के पिता की तरफ से वकील ने एक वीडियो सबूत पेश किया। इस वीडियो में बच्ची जिंदा नजर आ रही थी, जबकि पुलिस की रिपोर्ट में कहा गया था कि बच्ची पहले से ही मृत थी।
इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि वीडियो देखकर वे काफी परेशान हो गए। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस पूरे मामले में पुलिस और अस्पताल दोनों ने संवेदनहीनता दिखाई है।
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार, संबंधित थाना प्रभारी, दोनों प्राइवेट अस्पतालों और एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी किया है। साथ ही गाजियाबाद के पुलिस कमिश्नर और थाना प्रभारी को 13 अप्रैल को कोर्ट में पेश होने को कहा गया है।
अब आगे क्या होगा, इस पर भी कोर्ट ने साफ निर्देश दिए हैं। कोर्ट चाहता है कि इस मामले की जांच किसी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम या फिर केंद्रीय एजेंसी की निगरानी में हो, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
कोर्ट ने यह भी कहा कि पीड़ित परिवार को किसी तरह परेशान न किया जाए और उनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाए।
FAQs
प्रश्न: सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या कहा?
उत्तर: कोर्ट ने कहा कि यह पूरे सिस्टम की नाकामी है और पुलिस व अस्पतालों का रवैया बेहद लापरवाह और असंवेदनशील रहा।
प्रश्न: FIR में क्या गलती हुई थी?
उत्तर: FIR में सिर्फ हत्या का केस दर्ज किया गया, जबकि रेप और POCSO Act की धाराएं भी लगनी चाहिए थीं, जो नहीं जोड़ी गईं।
प्रश्न: आरोपी के साथ क्या हुआ?
उत्तर: आरोपी को गिरफ्तार किया गया, लेकिन बाद में पुलिस ने एक एनकाउंटर जैसी घटना की कहानी बताई, जिस पर सवाल उठ रहे हैं।
प्रश्न: अब आगे क्या कार्रवाई होगी?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस केस की जांच SIT या किसी केंद्रीय एजेंसी से करवाई जा सकती है और वह खुद इस मामले की निगरानी करेगा।

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